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भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री गुरु प्रकाश पासवान एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी द्वारा मीडिया संबोधन के मुख्य बिंदु

भारतीय जनता पार्टी राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री गुरु प्रकाश पासवान एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने आज शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया को संबोधित किया। श्री गुरु प्रकाश पासवान ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर दलित विरोधी मानसिकता, राजनीतिक अवसरवादिता और दलित समाज को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस का चाल, चेहरा और चरित्र दलित विरोधी रहा है। वहीं, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस और राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस समाज में जाति, भाषा, क्षेत्र और अन्य मुद्दों के माध्यम से विभाजन पैदा करने का प्रयास करती है, जबकि भारतीय जनता पार्टी समाज की सभी जातियों में सामंजस्य और सामाजिक न्याय के साथ समाधान की राजनीति में विश्वास करती है।

श्री गुरु प्रकाश पासवान ने प्रेस वार्ता की शुरुआत में दो वीडियोस दिखाए और कहा कि वीडियोस में कांग्रेस पार्टी और उनके युवराज राहुल गांधी के एजेंडा का पर्दाफाश हुआ है। वो लगातार समाज कैसे टूटे, समाज तोड़ने वाली शक्तियों का साथ देते हैं और झूठ को आधार बना करके एक नैरेटिव बनाने का प्रयास करते हैं। राहुल गांधी ने पहले बोला कि भाई ये हुआ है। 20 दिन बाद उनको स्मरण आया तब उन्होंने एफआईआर करवाया नहीं और आज ये ऐसी बात कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी जी का जो चेहरा है वो दलित विरोधी चेहरा है, नव-सामंती चेहरा है। कांग्रेस पार्टी आज खड़गे के सम्मान की बात कर रहे हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा वायनाड से चुनाव लड़ने जा रही थीं। चुनाव लड़ने के पूर्व नामांकन की प्रक्रिया होती है और नामांकन की प्रक्रिया में पार्टी के सभी वरिष्ठ लोग जाते हैं। अंदर कौन-कौन गया? प्रियंका गांधी गईं, सोनिया गांधी गईं, उनके पतिदेव गए, उनके बच्चे गए। लेकिन बाहर कौन खड़ा रहा? दरवाजे के बाहर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वृद्ध नेता मल्लिकार्जुन खड़गे जी बाहर से झांक रहे थे। क्या दलितों का स्थान अंदर नहीं है? क्या दलितों का स्थान बाहर है? 

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी के पास कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इतिहास गवाह है कि पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता वी. नारायणसामी कांग्रेस पार्टी के युवराज राहुल गांधी जी का फुटवियर, उनकी चप्पल उठा रहे हैं। खड़गे जी नामांकन केंद्र के कमरे के बाहर रहेंगे और वी. नारायणसामी, पुडुचेरी के पूर्व मुख्यमंत्री, इस प्रकार से चप्पल उठाएंगे तो कांग्रेस पार्टी की कैसी मानसिकता है, यह बताने की जरूरत नहीं है। हरियाणा की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री कुमारी शैलजा को बैनर-पोस्टर्स से गायब कर दिया गया है। ये कांग्रेस पार्टी का असल चाल, चेहरा, चरित्र है। तेलंगाना में उपमुख्यमंत्री बनाया गया बिस्मार्क जी, उन्हें जमीन पर बिठाया। हम कांग्रेस पार्टी के नेता युवराज राहुल गांधी से पूछना चाहते हैं कि ये दलित समाज, दलित सम्मान की बात आपको सिर्फ राजनीति के लिए याद आती है? राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए याद आती है?

श्री पासवान ने कहा कि इतिहास गवाह है कि किस प्रकार से बाबासाहेब अम्बेडकर हों, बाबू जगजीवन राम हों, बाबू जगजीवन राम को अंततोगत्वा कांग्रेस पार्टी छोड़नी पड़ी थी और पहली बार इस देश ने दलित समाज का उपप्रधानमंत्री देखा। वे उस सरकार में उपप्रधानमंत्री बनते हैं, जो भारतीय जनसंघ के द्वारा बनाई गई थी। 1971 की लड़ाई में रक्षामंत्री के रूप में देश का नेतृत्व कौन कर रहा था? इतना बड़ा युद्ध, लेकिन श्रेय से दलित समाज के बाबू जगजीवन राम को गायब कर दिया गया। बाबू जगजीवन राम के संदर्भ में नीरजा चौधरी की पुस्तक ‘हाऊ प्राइम मिनिस्टर्स डिसाइड’ में कथित रूप से कहा गया है कि केवल कांग्रेस पार्टी की वजह से एक दलित इस देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि राहुल गांधी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और समाज तोड़ने वाली शक्तियों के साथ खड़े रहते हैं। पहली बार देश के इतिहास में हमने देखा कि एक आदिवासी की बेटी संविधान के सर्वोच्च स्थान पर पहुंची। उदित राज और कांग्रेस पार्टी के विधिवत नेता विपक्ष अधीर रंजन चौधरी द्वारा इस पर निंदनीय टिप्पणी की गई। ये सूची कोई अंत नहीं है। आज, कल, हमेशा से कांग्रेस पार्टी का जो चाल, चेहरा और चरित्र है, वह दलित विरोधी रहा है। कर्नाटक में उपमुख्यमंत्री जी परमेश्वर, जब वे कांग्रेस में थे, उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि दलित होने के कारण उनको कर्नाटक का मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया। खड़गे जी कांग्रेस में अध्यक्ष तो बन जाते हैं, लेकिन खड़गे जी को कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री क्यों नहीं बनाया जाता है? राहुल गांधी जहां जाते हैं, पूरे देश में पूछते हैं कि एससी-एसटी-ओबीसी कहां हैं? आज काँग्रेस सरकार इतने प्रांतों में है, कितने एससी-एसटी-ओबीसी मुख्यमंत्री हैं? भाजपा को मौका मिलता है, ओडिशा में पहली बार हमारी सरकार बनती है तो एक आदिवासी समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में एक आदिवासी समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बनता है। मध्य प्रदेश में हमारी सरकार आती है तो मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार दलित समाज का व्यक्ति उपमुख्यमंत्री बनता है। राजस्थान में दलित समाज का व्यक्ति उपमुख्यमंत्री बनता है। बाबासाहेब अम्बेडकर के बाद देश के इतिहास में पहली बार कोई दलित समाज का व्यक्ति केंद्र में कानून मंत्री बनता है तो श्री अर्जुन राम मेघवाल बनते हैं।

श्री गुरु प्रकाश पासवान ने कहा की राहुल गांधी मान-सम्मान देंगे नहीं, कमरे के बाहर रखेंगे, दलितों से चप्पल उठवाने का काम करेंगे, शासन में, प्रशासन में, संस्थानों में किसी प्रकार की कोई भागीदारी देंगे नहीं, वर्तमान में भी यही स्थिति हो रही है। बिहार में विधानसभा चुनाव चल रहा था। बिहार कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार राम का पटना हवाई अड्डे के बाहर जो वीडियो आया था, वह दिल दहलाने वाला था। उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा था। यह कांग्रेस पार्टी की मानसिकता है। चाहे वह पंजाब के चन्नी हों, हरियाणा की शैलजा हों, बिहार के राजेश राम हों, कर्नाटक के परमेश्वर हों, तेलंगाना के विस्मार्क हों, केंद्र में खड़गे हों, ये सब उदाहरण दर्शाते हैं कि किस प्रकार कांग्रेस पार्टी ने मात्र दलित समाज को राजनीतिक रोटी सेंकने का माध्यम बनाया है। बाबासाहेब अम्बेडकर का इतिहास हमें मालूम है। बाबासाहेब अम्बेडकर चुनाव न जीतें, यह किसने सुनिश्चित किया था? बाबू जगजीवन राम से लेकर बाबासाहेब अम्बेडकर, कांशीराम, सीताराम केसरी, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे, उनके साथ क्या दुर्व्यवहार हुआ था, यह हम पूछना चाहते हैं।

श्री पासवान ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी से हमें अपनी प्रतिबद्धता का किसी प्रकार का कोई प्रमाणपत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। बाबासाहेब अम्बेडकर के जीवनकाल में, जन्म से लेकर उनके देहांत तक जहां-जहां उनका स्पर्श हुआ, उस स्थान को तीर्थ का दर्जा किसी ने दिया है तो आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने दिया है। दिल्ली के केंद्र में डॉ. अम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर है। हम वहां जाते हैं तो हमारा मान-सम्मान और स्वाभिमान बढ़ता है और हमें बड़ा ही गर्व होता है। कांग्रेस ने स्वयं के दो-दो प्रधानमंत्रियों को पद पर रहते हुए भारत रत्न दिया, लेकिन बाबासाहेब अम्बेडकर को भारत रत्न कब मिला? जब भाजपा समर्थित सरकार केंद्र में आती है। सदन में बाबासाहेब अम्बेडकर का तैल चित्र नहीं था। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद ही वहां पर तैल चित्र की उपस्थिति हुई।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि वे राहुल गांधी को सामाजिक न्याय, सामाजिक सशक्तिकरण, दलित समाज के मान-सम्मान, स्वाभिमान और प्रतिनिधित्व पर खुली चेतावनी देते हैं। स्कॉलरशिप हो, प्रतिनिधित्व हो, संस्थान हो, हर स्थान पर यदि वास्तव में सामाजिक न्याय बढ़ा है तो पिछले 12 वर्षों में बढ़ा है। आप दलित विरोधी कानून देखिए, जो एससी कम्युनिटी को मिलने वाली सहायता राशि थी, वह 85,000 से बढ़कर 8,25,000 हो जाती है। सब-प्लान में भी केंद्र सरकार 100 प्रतिशत तक का योगदान देती है। किस प्रकार से समाज के सभी वर्गों का मान-सम्मान बढ़े और संतुलन रहे, यह भाजपा सरकार सुनिश्चित कर रही है। राहुल गांधी और उनकी मानसिकता लगातार एक स्क्रिप्ट के तहत काम करती है। उनको दलित समाज के लोग दिखाई नहीं देते हैं। अभी कुछ दिनों पहले राहुल गांधी पैट्रियार्की पर आ गए थे, जो पैट्रियार्की में भी उनको लोग दिखाई नहीं दिए। उनको दलित समाज की बेटी नहीं दिखाई दी, आदिवासी की बेटी नहीं दिखाई देती है। कांग्रेस पार्टी का चेहरा, नव-सामंतवाद, घोर जातिवाद और दलित विरोधी इतिहास है। 

डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज स्थिति ये है कि अनेक प्रकार के स्वांग और प्रपंच रचकर भी मुझे लगता है कि राहुल गांधी के जो स्पीच रचनाकार हैं वो अपनी सृजनात्मकता खोते चले जा रहे हैं। 2014 में बाबा ब्रिगेड नाम से एक युवा का चेहरा तो 2019 में भारत के इतिहास में पहली बार कुर्ते के ऊपर जनेऊ पहन के अपना गोत्र बताने वाले और वहां से 2024 में पक्की दाढ़ी बढ़ाकर दिमागी नक्सल के रूप में एक कॉमरेड के रूप में सामने आने वाले, ये नाना प्रकार के स्वरूप भी उस सच को नहीं छुपा सकते। राहुल गांधी सृजनात्मकता खो चुके हैं। तो हर बार वो अपनी घिसी-पिटी लाइन के ऊपर ही भारत में टकराव उत्पन्न करने के नए-नए तरीके खोजने में व्यस्त रहते हैं। कांग्रेस को यदि वास्तविकता में दलित समाज के प्रति इतनी पीड़ा है, तो 18 जुलाई 2019 को भिवाड़ी में हरीश जाटव की के ऊपर कातिलाना हमला हुआ और 15 अगस्त को आत्महत्या कर ली थी। किसकी सरकार थी? कांग्रेस की सरकार थी। 15 सितंबर 2021 को अलवर में योगेश जाटव पर भीड़ ने हमला किया और 18 सितंबर को अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। 1 जुलाई 2021 को झालावाड़ में कृष्णा वाल्मीकि सड़क पर पिटाई हुई और 6 जुलाई को अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। क्यों? कांग्रेस सरकार थी मगर वो भीड़ जिसने हमला किया था वो एक पक्का वाला वोट बैंक था। तो एक तराज़ू पे तोला जाता है दलित की जान की कीमत और वो पक्के वाले हमारे वोट बैंक की कीमत। जब वो पक्का वोट बैंक दिखता है तो दलित का मान सम्मान और जान तीनों बहुत हल्का लगने लगता है।

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